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BNS धारा 5 क्या है? दण्डादेश का लघुकरण (Commutation of Sentence) – पूरी जानकारी सरल भाषा में

 

धारा - 5 दण्डादेश का लघुकरण
काल्पनिक चित्र 


📘 BNS धारा 5 – दण्डादेश का लघुकरण (Commutation of Sentence) क्या है?

भारतीय न्याय प्रणाली में दंड का उद्देश्य केवल अपराधी को सजा देना ही नहीं बल्कि सुधार और न्याय के बीच संतुलन बनाना भी होता है। इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) में धारा 5 का प्रावधान किया गया है, जिसे “दण्डादेश का लघुकरण” (Commutation of Sentence) कहा जाता है।

यह धारा न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी को यह अधिकार देती है कि वह किसी अपराधी को दी गई सजा को कम गंभीर सजा में परिवर्तित कर सके, बिना उस अपराधी की सहमति के।


पूरे लेख का मूल प्रावधान (Bare Act Text):- 


भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा - 5

दण्डादेश का लघुकरण- समुचित सरकार, अपराधी की सम्मति के बिना इस संहिता के अधीन किसी दंड का, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 474 के अनुसार, किसी अन्य दंड में लघुकरण कर सकेगी।


व्याख्या- इस धारा के प्रयोजन के लिए, "समुचित सरकार" पद से,- 

(क)- उन मामलों में केंद्रीय सरकार अभिप्रेत है, जिनमे दण्डादेश मृत्यु का दण्डादेश है, या ऐसे विषय, जिस पर संघ की कार्य पालिका शक्ति का विस्तार है, से संबंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए है। 


तथा 


(ख)- उन मामलों में उस राज्य की सरकार, अभिप्रेत हैं, जिसके भीतर अपराधी दण्डादिष्ट हुआ है, जहां की दंडदेश ( चाहे मृत्यु का हो या नही ) ऐसे विषय जिस पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार, संबंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए है।


🔶 धारा 5 का सरल अर्थ

दण्डादेश का लघुकरण का मतलब है –
👉 किसी कठोर सजा को कम कठोर सजा में बदल देना।

उदाहरण के लिए:

  • मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलना
  • आजीवन कारावास को निश्चित अवधि के कारावास में बदलना
  • कठोर कारावास को साधारण कारावास में बदलना


🔶 धारा 5 का कानूनी प्रावधान

BNS की धारा 5 के अनुसार, उपयुक्त सरकार (State Government या Central Government) यह अधिकार रखती है कि वह किसी दोषी व्यक्ति की सजा को निम्न प्रकार से कम कर सकती है:

  1. मृत्युदंड (Death Sentence)
    👉 इसे आजीवन कारावास में बदला जा सकता है।
  2. आजीवन कारावास (Life Imprisonment)
    👉 इसे निश्चित अवधि के कारावास (जैसे 14 वर्ष) में बदला जा सकता है।
  3. कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment)
    👉 इसे साधारण कारावास (Simple Imprisonment) में बदला जा सकता है।
  4. जुर्माना (Fine)
    👉 इसे कम किया जा सकता है या अन्य दंड में बदला जा सकता है।


🔶 दण्डादेश का लघुकरण क्यों जरूरी है?

धारा 5 का उद्देश्य न्याय में लचीलापन (Flexibility) बनाए रखना है। हर केस की परिस्थितियाँ अलग होती हैं, इसलिए सजा को परिस्थितियों के अनुसार बदला जा सकता है।

इसके प्रमुख उद्देश्य:

  • ✔️ अपराधी के सुधार की संभावना को बढ़ाना
  • ✔️ मानवीय आधार पर राहत देना
  • ✔️ न्याय और दया (Mercy) के बीच संतुलन बनाना
  • ✔️ विशेष परिस्थितियों में न्यायिक त्रुटि को सुधारना


🔶 धारा 5 और क्षमादान (Pardon) में अंतर

आधारदण्डादेश का लघुकरणक्षमादान (Pardon)
अर्थसजा को कम करनासजा को पूरी तरह खत्म करना
दोषअपराध बना रहता हैअपराध समाप्त हो सकता है
उदाहरणमृत्युदंड → आजीवन कारावासपूरी सजा माफ

👉 यानी, लघुकरण में सजा खत्म नहीं होती, बल्कि हल्की हो जाती है।


🔶 न्यायालय और सरकार की भूमिका

  • न्यायालय (Court) सजा सुनाता है
  • सरकार (Executive) सजा को कम (Commutation) कर सकती है

यह शक्तियाँ संविधान और कानून द्वारा दी गई हैं ताकि न्याय में संतुलन बना रहे।


🔶 उदाहरण से समझें

मान लीजिए किसी व्यक्ति को हत्या के अपराध में मृत्युदंड दिया गया है।
लेकिन बाद में उसकी उम्र, स्वास्थ्य और व्यवहार को देखते हुए सरकार यह निर्णय लेती है कि उसकी सजा को कम कर दिया जाए।

👉 इस स्थिति में:
मृत्युदंड → आजीवन कारावास
यही दण्डादेश का लघुकरण कहलाता है।


🔶 महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह अधिकार सरकार के पास होता है
  • अपराधी की सहमति जरूरी नहीं होती
  • सजा कम होती है, खत्म नहीं होती
  • यह न्याय प्रणाली का एक मानवीय पहलू है

🔶 BNS धारा 5 का महत्व

धारा 5 भारतीय न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि:

  • न्याय केवल कठोर न हो, बल्कि न्यायपूर्ण और मानवीय भी हो
  • हर केस की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जा सके
  • अपराधी को सुधार का अवसर मिले

🔚 निष्कर्ष

BNS की धारा 5 – दण्डादेश का लघुकरण एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है जो न्याय और दया के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यह न केवल अपराधी को सुधारने का मौका देता है बल्कि समाज में न्याय की भावना को भी मजबूत करता है।

इस धारा के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय न्याय प्रणाली केवल दंड देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मानवीय मूल्यों को भी महत्व देती है।



(IPC) की धारा 54 को (BNS) की धारा 5 में बदल दिया गया है।
(IPC) की धारा 54 को (BNS) की धारा 5 में बदल दिया गया है।


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